कामयाबी एक दिन में नहीं मिलती,
वह हालातों की आग में तपकर पैदा होती है।
लेकिन दुनिया उसे बस कह देती है
“किस्मत अच्छी थी।”
यह कहानी है उन लाखों युवाओं की
जो मिडिल क्लास के सबसे निचले पायदान से
सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं।
जिनके पास सुविधाएँ नहीं,
बस मां-बाप का भरोसा होता है
किराया, खेत का चावल-आटा,
गैस और कुछ किताबें।
कम पैसों में महीना निकालना,
कम समय में खाना बनाना
और बाकी वक्त सपनों को देना
यही उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी है।
जला खाना भी सम्मान से खाया जाता है,
क्योंकि उसमें मां-बाप की मेहनत होती है।
जहाँ दुनिया बाइक और आईफोन का इंतज़ार करती है,
वहीं ये युवा वैकेंसी और रिज़ल्ट का।
जात-धर्म से भरे समाज में
इनकी एक थाली सबको जोड़ देती है।
इनका सपना बस एक है
परीक्षा पास करना
और मां-बाप को वह ज़िंदगी देना
जिसका उन्होंने कभी सपना देखा था।
मुझे गर्व है
ऐसे जुझारू सपनों और छात्रों पर..!!🖤
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