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�� व्याख्या :- राजस्थान में त्याग प्रथा का सम्बन्ध क्षत्रिय वर्ग के समाज से था।विवाह के अवसर पर चारण, भाट, ढोली आदि वधू-पक्ष से दान-दक्षिणा प्राप्ति के लिए हठ करते थे तथा उनकी हट को पूरा करने को वधू-पक्ष की सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता था।��
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