Brahma Kumaris @brahmakumaris 23.02.2026 09:18 Скопировать Пожаловаться हम धीरे-धीरे वैसे बनते जाते हैं, जिसे हम बार-बार याद करते हैं। स्मरण केवल किसी का चेहरा नहीं लाता, उसके गुण भी हमारे भीतर जगाने लगता है। मन जिन विचारों को दोहराता है, वे ही हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाते हैं। यदि हम भय को पकड़े रहें, तो अस्थिरता बढ़ती है। यदि हम ईश्वर को याद करें, तो शक्ति और शांति भीतर उतरने लगती है। ईश्वर का स्मरण केवल पूजा नहीं, एक ऊँची चेतना से जुड़ना है। जिससे रोज़ जुड़ते हो, वैसी ही ऊर्जा जीवन में उतरती है। ❤ 29 🥰 1 8 2.2K
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