गीता सत्रों से जुड़ने का लिंक:
https://acharyaprashant.org/hi/live-sessions?t=enq&cmId=m00002-c83
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मेरी गीता यात्रा की शुरुआत
एक फेसबुक पोस्ट से हुई थी।
वहीं से आचार्य जी को सुना,
और पहला वीडियो देखा -
“आप किसी को ना क्यों नहीं कह पाते।”
वो मेरे लिए झकझोर देने वाला था।
पहले स्वीकार करना मुश्किल लगा,
लेकिन फिर सुनना शुरू किया
तो घंटों सुनती रहती थी।
समझ तुरंत नहीं आती थी,
लेकिन भीतर कुछ चल रहा था।
धीरे-धीरे सुनते-सुनते
एक सहजता आने लगी।
आज जब पुरानी तस्वीरें देखती हूँ,
तो साफ़ दिखता है
कि कितना बदलाव आया है।
पहले की मैं और अब की मैं
अलग लगती हैं।
फिर एक दिन
संस्था से कॉल आया -
गीता यात्रा शुरू हो रही है।
ऐसा लगा जैसे
प्यासे को पानी मिल गया हो।
बीच में मुश्किलें भी थीं,
विरोध भी था,
लेकिन ध्यान सिर्फ़ गीता यात्रा पर रहा।
आज जो भी हूँ,
जितना भी कुछ सही है,
सब उसी का परिणाम है।
अभी भी उतार-चढ़ाव आते हैं,
लेकिन अब दिख जाता है
कि भीतर क्या चल रहा है।
प्रक्रिया जारी है -
धीरे-धीरे साफ़ होने की।
और अब इतना स्पष्ट है -
जो मैं सच में हूँ,
उसी को जानना है।
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