गीता सत्रों से जुड़ने का लिंक:
https://acharyaprashant.org/hi/live-sessions?t=enq&cmId=m00002-c84
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मुझे हमेशा ऐसी जगहों
की ओर खिंचाव रहा है
जहाँ प्रकृति अभी भी
अपनी असल रूप में हो।
शहरों की भागदौड़ से दूर,
जहाँ जीवन थोड़ा शांत
और सच्चा महसूस होता है।
हर बार जब ऐसे किसी
स्थान पर जाती हूँ,
कुछ बदलता है भीतर।
समुद्र के किनारे खड़े होकर
कभी ऐसा लगा कि
वो सामने कम,
अंदर ज्यादा फैल रहा है।
पहाड़, हवा, रास्ते -
सब अपने तरीके से
अहसास बदल देते हैं।
इसी दौरान गीता सत्रों से
जुड़ने का अवसर मिला।
अब यह भी दिखने लगा है कि
जो खुलापन इन यात्राओं में महसूस होता है,
वह सिर्फ़ जगहों की वजह से नहीं है।
कुछ भीतर भी ढीला पड़ रहा है,
कुछ पकड़ कम हो रही है।
हर सफ़र के बाद
थोड़ा और हल्कापन आता है,
जैसे खुद से जुड़ना आसान हो रहा है।
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