नागपुर में आचार्य प्रशांत का पहला सार्वजनिक सत्र सम्पन्न: अभूतपूर्व स्वागत व उत्साह
नागपुर में 9 अप्रैल को आयोजित आचार्य प्रशांत का पहला सार्वजनिक सत्र अभूतपूर्व उत्साह और ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। सत्र शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले ही लोग स्थल पर पहुंचने लगे थे, और देशभर से आए उपस्थित जनसमूह में आचार्य जी से मिलने की गहरी उत्सुकता स्पष्ट दिख रही थी। “वेलकम टू नागपुर, आचार्य जी” और “थैंक यू, आचार्य जी” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। बड़ी संख्या में लोगों ने न केवल प्रत्यक्ष रूप से सत्र में भाग लिया, बल्कि दुनियाभर से 1 लाख से अधिक श्रोताओं ने इसे ऑनलाइन भी सुना।
सत्र के दौरान आचार्य प्रशांत ने अष्टावक्र गीता के गहन सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए अहंकार, आत्मा और धर्म के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि वास्तविक प्रगति तब होती है जब व्यक्ति भीतर चल रहे हलचल का ईमानदारी से अवलोकन करता है, और धन का सही उपयोग वही है जो स्वतंत्रता की ओर ले जाए।
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