प्रश्नोत्तर के दौरान लोगों ने खुलकर सवाल पूछे और जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। अहंकार, संबंध, सामाजिक व्यवहार और जीवन की दिशा जैसे मुद्दों पर बात हुई। देहरादून-ऋषिकेश क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन और उसके कारण हो रहे वनों के कटाव का मुद्दा भी उठा। इस पर आचार्य प्रशांत ने स्पष्ट किया कि जब जीवन में सही समझ और दिशा का अभाव होगा, तब तक बाहरी विकास भी असंतुलन और पर्यावरणीय नुकसान का कारण बनता रहेगा। यह सत्र एक गहन और सहभागी संवाद के रूप में सामने आया, जिसने लोगों को अपने जीवन और समाज को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा दी।
सत्र के विडिओ आपके साथ जल्द ही साझा किए जाएंगे।
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