गीता सत्रों से जुड़ने का लिंक:
https://acharyaprashant.org/hi/live-sessions?t=enq&cmId=m00002-c2
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पता नहीं वो डरा हुआ, सहमा हुआ, आत्म-संदेह में जीता हुआ धर्मेश कब पीछे छूट गया।
आचार्य जी, आपसे जुड़ने से पहले जीवन बस चल रहा था, दिशा नहीं थी। शरीर कमज़ोर था, पर उससे भी ज़्यादा मन कमज़ोर था।
आपके गीता सत्रों ने सिर्फ श्लोक नहीं समझाए, जीवन का आईना दिखाया। बहाने टूटे, भ्रम टूटे, और धीरे-धीरे भीतर साहस जन्म लेने लगा।
आज एक साल बाद जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो परिवर्तन सिर्फ शरीर में नहीं, सोच, दृष्टि और आत्मविश्वास में दिखता है।
जो लोग कहते हैं कि बिना दूध-घी के शरीर नहीं बनता, उनके लिए ये जवाब नहीं, प्रत्यक्ष प्रमाण है। आपने नया जीवन नहीं दिया - जीना सिखाया है।
आभार शब्द छोटा है,
पर कृतज्ञता सच्ची है।
🙏
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