दिल्ली-एनसीआर में आचार्य प्रशांत का एक यादगार भगवद्गीता सत्र ✨️
4 अप्रैल को आयोजित इस विशेष सत्र में देशभर से बड़ी संख्या में लोग जुड़े और ऑनलाइन भी एक लाख से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता दिखाई। मुख्य सत्र से पहले हुई रोचक ऐक्टीविटीस ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया। आचार्य जी ने गीता के श्लोक 7.8 की व्याख्या करते हुए बताया कि ‘पौरुष’ अहंकार का विस्तार नहीं, बल्कि उसका विघलन है।
प्रश्नोत्तर सत्र में जब misinformation और disinformation पर सवाल उठा, तो उन्होंने गहरी बात रखते हुए संकेत दिया कि समाधान बाहर नहीं, भीतर तलाशना होगा। सत्र के बाद बुक साइनिंग के समय भी लोगों का उत्साह देखने लायक था। खासकर बच्चों की जिज्ञासा ने पूरे आयोजन को और भी विशेष बना दिया।
सत्र के वीडियो जल्द ही आपके साथ साझा किये जाएंगे।
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