गीता सत्रों से जुड़ने का लिंक:
https://acharyaprashant.org/hi/live-sessions?t=enq&cmId=m00002-c53
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बचपन से ही
आम महिलाओं और गृहणियों को देखकर
एक बात साफ़ थी -
मुझे वैसा नहीं जीना है!
मुझे खाना बनाना पसंद है
पर रसोई को कभी अपना केंद्र बनाना नहीं।
गीता सत्रों से जुड़कर समझा कि
ज़िन्दगी का केंद्र सही होना कितना ज़रूरी है।
काम के साथ - जिम, पढ़ना, घूमना
और खुद को बेहतर बनाना ही
अब मेरी ज़िन्दगी है।
मैं चाहती हूँ
मेरी माँ और भाभियाँ भी अपने लिए जिएँ।
अब समझ आया है -
बदलाव बाहर से नहीं
अंदर से आता है।
गीता सत्रों ने सिखाया
कि अपनी ज़िन्दगी की दिशा
खुद तय करनी होती है।
🙏
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