महिलाएं मदद के लिए दरवाज़ा खटखटा रही हैं और सरकार ने दरवाज़े बंद कर रखे हैं।
मैंने संसद में पूछा: जब कोई महिला हिंसा से भागकर वन स्टॉप सेंटर (OSC) पहुंचती है—तो उसे मदद क्यों नहीं मिलती, ताला क्यों मिलता है? स्टाफ़ की कमी क्यों है? देश भर की शिकायतें अनसुनी क्यों हैं?
सरकार का जवाब क्या था? सब “संतोषजनक” है।
अगर सब “संतोषजनक” है, तो OSC को लेकर इतनी समस्याओं की खबरें क्यों सामने आ रही हैं?
अगर सुरक्षा प्राथमिकता है, तो हर 5 में से 3 महिलाओं तक मदद अभी भी क्यों नहीं पहुंच पा रही है? और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के हर ₹100 में से सिर्फ़ 60 पैसे ही OSC पर क्यों खर्च हो रहे हैं?
सुरक्षा कोई योजना नहीं, बल्कि सरकार की बुनियादी ज़िम्मेदारी है। हर बात को “संतोषजनक” कहना सुरक्षा नहीं देता; यह दिखाता है कि मोदी सरकार किसी की भी सुन नहीं रही है।
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