कोई शहर ‘स्मार्ट’ नहीं हो सकता, अगर वह अपने नागरिकों को बुनियादी गरिमा - साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा नहीं दे पाता।
आपको मोदी सरकार का स्मार्ट सिटी मिशन तो याद ही होगा है, जिसके तारीफों के पुल बांधते प्रधानमंत्री थकते नहीं थे!
अब जब यह योजना अपने समापन की ओर है- मैंने संसद में सरकार से इसके वास्तविक परिणामों का हिसाब मांगा। और जो सच सामने आया उसे धोखे के अलावा कुछ और कह ही नहीं सकते- इस योजना का उद्देश्य कभी भी पूरे शहर का विकास करना ही नहीं था।
देश को एक आधी-अधूरी योजना को पूरे बदलाव की कहानी बनाकर बेचा गया।
सवाल पूछे कि * स्मार्ट सिटी की परिभाषा क्या है? * सफलता किस आधार पर तय हुई? * कितने शहर सच में बदले? * लोगों के जीवन में क्या…
Обсуждение 0
Обсуждение не доступно в веб-версии. Чтобы написать комментарий, перейдите в приложение Telegram.
Обсудить в Telegram