भारतीय संविधान के रचयिता,
भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को,
महापरिनिर्वाण दिवस पर कोटी-कोटी प्रणाम!
बाबा साहेब का पूरा जीवन दलितों, शोषितों, वंचितों और पिछड़ों को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्षरत था। उन्होंने हमेशा मजदूर वर्ग व महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया। बाबा साहेब न केवल दलितों के मसीहा बल्कि महान चिंतक, समाज सुधारक, न्यायविद व अर्थशास्त्री भी थे।
बाबा साहेब कहते थे कि यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए।
ऐसे महामानव को नमन....!
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